3 Oct 2026, Sat

सरगुजा में खेती का नया मॉडल: धान से आगे बढ़े किसान, सौर पंप से बहुफसली खेती और मछली-पशुपालन से बढ़ी कमाई

 

रायपुर, 02 अक्टूबर 2026

गांवों की समृद्धि की राह खेतों से होकर गुजरती है। किसान को उसकी उपज के लिए व्यवस्थित बाजार मिले, खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचे, मिट्टी की सेहत की सही जानकारी हो और खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन एवं उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से आय के अतिरिक्त अवसर मिलें तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलती है। सरगुजा जिले में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इसी समन्वित दृष्टिकोण के साथ किसानों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने के लिए सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा परीक्षण और कृषि विविधीकरण पर जोर दिया जा रहा है। वहीं पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर तैयार कर रही हैं। इन प्रयासों से खेती अब केवल एक फसल तक सीमित न रहकर आजीविका के विविध साधनों से जुड़ रही है।

धान खरीदी से किसानों को मिला व्यवस्थित बाजार का आधार

सरगुजा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान धान उपार्जन में बड़ी संख्या में किसानों ने भागीदारी की। जिले में 60 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन हुआ। धान खरीदी केंद्रों में ऑनलाइन टोकन, नमी परीक्षण, बारदाना और भुगतान की व्यवस्था के साथ किसानों के लिए पेयजल एवं बैठने जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया।

व्यवस्थित धान खरीदी व्यवस्था किसानों के लिए अपनी उपज बेचने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी। खरीदी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं से किसानों को उपज विक्रय की प्रक्रिया में सहूलियत मिली और कृषि उपज के लिए बाजार तक पहुंच का आधार मजबूत हुआ।

8,893 किसानों तक पहुंची सौर सिंचाई, बहुफसली खेती को मिला विस्तार

खेती में सिंचाई की उपलब्धता फसल विविधीकरण की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक है। सरगुजा में सौर सुजला योजना के माध्यम से किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2016-17 से अब तक जिले के 8,893 किसानों को सौर पंप का लाभ मिला है।

सौर सिंचाई की उपलब्धता से किसानों के लिए धान के अलावा दूसरी फसलें लेने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। लखनपुर विकासखंड के ग्राम ईरगंवा निवासी किसान लबेद सिंह इसका उदाहरण हैं। सौर पंप की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलदार पौधों और फूलों की खेती को अपनाया तथा मछली पालन को भी अपनी आजीविका से जोड़ा।

मिट्टी की सेहत जानकर वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ रहे किसान

खेती में केवल अधिक उर्वरक का उपयोग बेहतर उत्पादन की गारंटी नहीं है। खेत की मिट्टी को किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है, इसकी सही जानकारी के आधार पर संतुलित पोषण प्रबंधन महत्वपूर्ण है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मृदा परीक्षण किसानों को इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती करने में मदद कर रहे हैं।

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मृदा परीक्षण से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उनकी कमी की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों और अन्य पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं। इससे अनावश्यक उर्वरक उपयोग और लागत को नियंत्रित करने के साथ फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल लेने से पहले मृदा परीक्षण कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुरूप पोषक तत्व प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं।

‘मोर गांव मोर पानी’ से जल संरक्षण को मिला जनभागीदारी का आधार

जल संरक्षण खेती के स्थायी भविष्य की बुनियादी आवश्यकता है। सरगुजा में ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किए गए हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर उपलब्ध पानी को सहेजने पर जोर दिया गया।

अभियान से जुड़े विभागीय विवरण के अनुसार कई स्थानों पर भूजल स्तर में 1 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया। भूजल की उपलब्धता बेहतर होने से सिंचाई और विशेष रूप से रबी फसलों की संभावनाओं को मजबूती मिल रही है। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखकर खेती और ग्रामीण आजीविका से जोड़ने का आधार तैयार किया है।

डबरी में सहेजा पानी, खेती के साथ मछली पालन का भी मिला अवसर

खेत में बनी छोटी जल संरचना भी किसान के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कुम्हरता की सूरत कुमारी ने ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से अपने खेत में डबरी का निर्माण कराया। वर्ष 2024-25 में 2.99 लाख रुपये की स्वीकृति से बनी इस डबरी में लगभग छह फीट पानी उपलब्ध रहने से खेती के लिए जल का उपयोग किया जा रहा है।

डबरी के पानी से सब्जी, गेहूं और अरहर जैसी फसलों की खेती में मदद मिल रही है। इसके साथ मछली पालन को भी आजीविका से जोड़ा गया है। इस तरह जल संरक्षण की एक संरचना सिंचाई के साथ कृषि विविधीकरण और अतिरिक्त आय की संभावनाओं का आधार बन रही है।

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‘सरगुजा छेरी बैंक’ से ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने की पहल

कृषि के साथ पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरगुजा में ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आजीविका से जोड़ने के लिए ‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल की पहल की गई है। इसके प्रारंभिक चरण में 50 महिलाओं को जोड़कर 76 बकरियों के साथ शुरुआत की गई।

इस मॉडल में महिलाओं को नकद ऋण देने के बजाय बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चार वर्षों में 16 मेमने लौटाने होते हैं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर देना और उसी संसाधन को आगे अन्य हितग्राहियों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना है।

एक फसल से आगे बढ़कर आय के विविध स्रोतों की ओर किसान

सरगुजा में कृषि विकास की तस्वीर अब केवल धान या किसी एक फसल तक सीमित नहीं है। सिंचाई की उपलब्धता, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से किसानों के लिए दलहन, तिलहन, सब्जी, फल-फूल और अन्य फसलों को अपनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। खेती के साथ मछली पालन और पशुपालन को जोड़ने से आय के अतिरिक्त स्रोत भी तैयार हो रहे हैं।

कृषि विविधीकरण का यह मॉडल उपलब्ध भूमि, पानी और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर आधारित है। मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई संसाधनों का समुचित उपयोग और खेती से जुड़ी सहायक गतिविधियों का विस्तार ग्रामीण परिवारों की आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

समृद्ध किसान से मजबूत गांव और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर

किसान की समृद्धि केवल फसल उत्पादन बढ़ने से नहीं, बल्कि खेती की लागत के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और आय के विविध स्रोत विकसित होने से जुड़ी है। सरगुजा में धान खरीदी से बाजार का आधार, सौर पंपों से सिंचाई, मृदा परीक्षण से वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन, जल संरक्षण से खेती को स्थायित्व तथा पशुपालन और मछली पालन से अतिरिक्त आजीविका के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

कृषि और ग्रामीण विकास के इन प्रयासों का समन्वय खेत से परिवार और परिवार से गांव तक आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में आधार तैयार कर रहा है। अन्नदाता को संसाधन, तकनीक और अवसरों से जोड़ने की यही प्रक्रिया समृद्ध किसान, मजबूत गांव और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की राह को आगे बढ़ा रही है।

क्रमांकः 9064/सुनील त्रिपाठी/विशाल

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