रायपुर, 27 अक्टूबर। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर छत्तीसगढ़ में दिखने लगा है। मंगलवार सुबह से रायपुर समेत कई जिलों में आसमान में बादल छाए हुए हैं और ठंडी हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की आशंका है।
चक्रवात के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के 12 जिलों को अति संवेदनशील घोषित किया गया है। प्रशासन ने 779 राहत शिविर तैयार किए हैं, जिनमें करीब एक लाख लोगों को ठहराने की व्यवस्था की गई है। वहीं, दंतेवाड़ा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है।

28 अक्टूबर को चार जिलों में रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर को चार जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है। रायपुर समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में चक्रवात का असर अधिक रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर 200 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है।

मंगलवार को प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। वहीं, एक-दो स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।
अगले दो दिनों में प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर मध्यम बारिश हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ के बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ने की संभावना है।
12 जिलों में ज्यादा खतरा, प्रशासन अलर्ट
चक्रवात से संभावित नुकसान को देखते हुए सरकार ने 12 जिलों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इनमें सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर शामिल हैं।
इन जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का असर पड़ने की आशंका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने आपदा से निपटने के लिए कार्ययोजना जारी की है।
इसके तहत 12 अति संवेदनशील जिलों के 763 बाढ़ प्रभावित गांवों की पहचान की गई है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य 21 जिलों में 1,006 संवेदनशील गांव चिह्नित किए गए हैं। प्रशासन को इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
779 राहत शिविर तैयार, एक लाख लोगों के ठहरने की व्यवस्था
सरकार ने संभावित आपदा से निपटने के लिए कुल 779 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इनमें 12 संवेदनशील जिलों में 341 और अन्य जिलों में 438 शिविर शामिल हैं।
राहत शिविरों में पीने का पानी, भोजन, दवाइयां और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को इन शिविरों में पहुंचाया जाएगा।
प्रशासन को गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सुरक्षित निकालने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। तेज हवाओं से क्षतिग्रस्त हो सकने वाले मकानों की पहचान करने और ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को सतर्क करने को भी कहा गया है।
SDRF की 7 टीमें तैयार, NDRF भी संभालेगी मोर्चा
चक्रवात के दौरान राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य में SDRF की सात टीमें तैयार की गई हैं। प्रत्येक टीम में 36 जवान हैं। इन टीमों की तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर में की जा रही है।
दुर्ग में NDRF की एक टीम पहले से मौजूद है। वहीं, सुकमा, बस्तर और बीजापुर में भी NDRF की एक-एक टीम तैनात करने की तैयारी की जा रही है।
इसके अलावा सभी जिलों में नगर सेना के 828 प्रशिक्षित जवान और 3,895 आपदा मित्रों को तैनात किया जा रहा है। SDRF के पास बचाव कार्यों के लिए 1,450 उपकरण उपलब्ध हैं। इनमें पानी के अंदर देखने वाले कैमरे, हाइड्रोलिक कटर और रबर बोट जैसे उपकरण शामिल हैं।
अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयां तैयार रखने के निर्देश
संभावित आपदा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। 12 संवेदनशील जिलों के 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और डॉक्टर उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, अन्य 21 जिलों में 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रखने को कहा गया है।
पशुओं की देखभाल और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सकों के माध्यम से आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आपदा के दौरान घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
24 घंटे चालू रहेगा कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन नंबर 1070 जारी
राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। आपदा से संबंधित सहायता के लिए लोग टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
राज्य नियंत्रण कक्ष सभी जिलों के कंट्रोल रूम के संपर्क में रहेगा। जिलों में कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित करने और उनके संपर्क नंबरों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग के साथ समन्वय किया जा रहा है। गंगरेल डैम और ओडिशा के खातीगुड़ा डैम तथा मुरान बांध से भी संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।
बांधों से पानी छोड़ने की स्थिति बनने पर प्रशासन को 48 घंटे पहले सूचना देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बाढ़ में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी
भारी बारिश के कारण गांवों में पानी भरने या लोगों के बाढ़ में फंसने की स्थिति बनने पर जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया जाएगा। इसके लिए रायपुर और बस्तर में मौजूद हेलीकॉप्टर बेस से संपर्क किया गया है।
नदी, नाले, पुल-पुलिया और पानी में डूबी सड़कों पर खतरा होने की स्थिति में लोगों की आवाजाही रोकने के निर्देश दिए गए हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाया जाएगा।
दंतेवाड़ा में स्कूल बंद, किसानों को भी सलाह
चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दंतेवाड़ा जिले में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी की है।
किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने फसल काट ली है, उन्हें उपज सुरक्षित स्थानों पर रखने और खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था करने को कहा गया है।
इससे बारिश के कारण फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
नुकसान का सर्वे कर सड़क और बिजली व्यवस्था बहाल करने की तैयारी
सरकार ने चक्रवात का असर समाप्त होने के बाद नुकसान का आकलन करने की भी तैयारी की है। राजस्व, कृषि, पंचायत, पशुपालन, नगरीय प्रशासन, लोक निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दूरसंचार विभाग को मकानों, फसलों, पशुओं तथा संचार व्यवस्था को हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रभावित इलाकों में पेयजल की जांच, सफाई और बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मृत पशुओं को सुरक्षित तरीके से हटाने के साथ क्षतिग्रस्त सड़कों, पुल-पुलियों, तटबंधों और नालियों की मरम्मत की जाएगी। बिजली और दूरसंचार सेवाओं को जल्द बहाल करने पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और नदी-नालों के उफान पर होने की स्थिति में उनसे दूर रहें। आपात स्थिति में सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करें।


