• विश्व हृदय दिवस पर उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में जागरूकता कार्यशाला, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह
रायपुर, 29 अक्टूबर 2026

हृदय रोग अब केवल उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, मानसिक तनाव और खानपान की गलत आदतों के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। 25 से 35 वर्ष की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो इसके परिणाम जानलेवा हो सकते हैं।

विश्व हृदय दिवस के अवसर पर राजधानी के उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में आयोजित हृदय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला में गोल्ड मेडलिस्ट हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जिनेश जैन ने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लोगों को हृदय रोग के जोखिम कारकों, शुरुआती लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। कार्यशाला में शहर के विभिन्न वर्गों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

युवाओं में हार्ट अटैक के मामले चिंता का विषय
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. जिनेश जैन ने कहा कि हृदय रोगों के बढ़ते मामले स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती हैं। पहले हृदय रोग को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके जोखिम कारक तेजी से सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पारिवारिक इतिहास, अत्यधिक मानसिक तनाव, नींद की कमी, धूम्रपान, शराब का सेवन, फास्ट फूड और शारीरिक गतिविधियों का अभाव हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। युवाओं को इन जोखिमों के प्रति गंभीर रहने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की जरूरत है।
बदलती जीवनशैली बन रही दिल की सेहत की दुश्मन
डॉ. जैन के अनुसार, अनियमित दिनचर्या और खानपान की गलत आदतें हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकती हैं। अत्यधिक नमक और वसा का सेवन, कोल्ड ड्रिंक्स तथा जंक फूड की अधिकता, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने कहा कि कम उम्र में हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच कराकर हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
छाती में भारीपन और सांस फूलने को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने हृदय रोग के संभावित लक्षणों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। छाती में दबाव या भारीपन, गर्दन अथवा जबड़े में दर्द, कंधे या बांह में असहजता, असामान्य पसीना, सांस फूलना और थोड़ी गतिविधि में अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हालांकि, ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन इनके सामने आने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है। अचानक छाती में तेज दबाव, सांस लेने में कठिनाई या ठंडे पसीने जैसे लक्षण होने पर तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
सैकड़ों जटिल मामलों में काम करने का अनुभव
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद डॉ. जिनेश जैन गोल्ड मेडलिस्ट हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें हृदय रोगों के उपचार के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने अपने संबोधन में लोगों को बीमारी के उपचार के साथ-साथ उसकी रोकथाम पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
इलाज के साथ जागरूकता भी जरूरी : डॉ. विनोद सिंह
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उर्मिला मेमोरियल हॉस्पिटल के संचालक डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करना भी है। समय पर बीमारी की पहचान और उचित चिकित्सकीय सलाह से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लोगों को अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रोजाना 30 मिनट पैदल चलने से करें शुरुआत
कार्यशाला के अंत में विशेषज्ञों ने स्वस्थ हृदय के लिए कुछ जरूरी उपाय बताए। इनमें रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना, योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करना, संतुलित एवं फाइबर युक्त भोजन लेना, नमक और तेल का सीमित उपयोग करना तथा पर्याप्त नींद लेना शामिल है।
इसके साथ ही धूम्रपान से बचने, शराब से दूरी बनाने, तनाव को नियंत्रित रखने और नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल की जांच कराने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि हृदय की सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। जागरूकता, संतुलित जीवनशैली और समय पर उपचार ही दिल को स्वस्थ रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।


