प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 13 दिसंबर 2025

भारत के सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादक वेदांता एल्युमीनियम ने वित्तीय वर्ष 2025 में 1.57 बिलियन यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपभोग कर देश के ऊर्जा और डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2021 की तुलना में ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन तीव्रता में 8.96% की कमी दर्ज की है।
वेदांता एल्युमीनियम ने लगभग 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की दीर्घकालिक खरीद योजना को मजबूत करते हुए ऊर्जा-दक्षता परियोजनाओं का विस्तार किया है। ऊर्जा संरक्षण, प्रक्रिया अनुकूलन, डिजिटल हस्तक्षेप और संसाधन दक्षता के जरिए कंपनी ने 378 मिलियन यूनिट (एमयू) ऊर्जा की बचत हासिल की है। इसमें उन्नत वेस्ट-हीट रिकवरी, बॉयलर-टर्बाइन के बेहतर प्रदर्शन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे उपाय शामिल हैं।
कंपनी की पेटेंटेड पॉटलाइनिंग तकनीक प्रति टन एल्युमीनियम उत्पादन में 200 किलोवाट तक ऊर्जा की बचत कर स्मेल्टर की दक्षता बढ़ा रही है। दीर्घकालिक जलवायु रणनीति के तहत वेदांता एल्युमीनियम ने 2025 में पीडब्ल्यूसी इंडिया के साथ रणनीतिक साझेदारी की है, ताकि डीकार्बनाइजेशन, जल-धनात्मकता और जैव विविधता से जुड़ी पहलों को सभी प्रमुख स्थानों पर तेज किया जा सके।
2030 के लक्ष्यों के अनुरूप, कंपनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में 30% हिस्सेदारी लो-कार्बन एल्युमीनियम की तय की है, जिसे रेस्टोरा और रेस्टोरा अल्ट्रा श्रृंखला के विस्तार से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही सामुदायिक संरक्षण पहलों में 141.1 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
इस उपलब्धि पर वेदांता एल्युमीनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा, “1.57 बिलियन यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर हम कम-कार्बन भविष्य की ओर अपनी यात्रा को तेज कर रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा और दक्षता को संचालन के केंद्र में लाना भारत के हरित विनिर्माण परिवर्तन का नेतृत्व करने के हमारे संकल्प को दर्शाता है।”
ऊर्जा जिम्मेदारी की संस्कृति को मजबूत करने के लिए कंपनी ने सभी स्थलों पर ऊर्जा-दक्षता प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि आईएसओ 50001 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ऊर्जा प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सके।





