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IAS RANU SAHU : पहले DSP फिर IAS अफसर बनीं, 540 करोड़ के कोयला घोटाले में आया नाम, फिर जाना पड़ा जेल, पढ़ें रानू साहू के जन्मदिन पर उनकी जिंदगी से जुड़ी ये कहानी…

कोयला घोटाले में जेल में बंद निलंबित आईएएस रानू साहू को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। रानू साहू को ईडी ने कोयला लेवी घोटाला और भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन आय से अधिक मामले में EOW की टीम ने उनपर मुकदमा दर्ज किया और अभी भी रानू साहू रायपुर के सेंट्रल जेल में बंद है ।रानू साहू 2010 बैच की आईएएस अधिकारी थीं। उनकी पहली पोस्टिंग कांकेर जिले में हुई थी। 

प्रमोद मिश्रा

रायपुर, 04 सितंबर 2024

छत्तीसगढ़ की गरियाबंद जिले की पांडुका की रहने वाली रानू साहू CGPSC क्लियर कर 2005 में पहली बार DSP बनी और फिर 2010 में UPSC क्लियर कर IAS अफसर बनीं । यह कहानी है छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस अधिकारी रानू साहू की। इन दिनों वह जेल में बंद हैं। रानू साहू के खिलाफ ईडी ने कोयला घोटाले और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। तकरीबन 15 माह से जेल में बंद रानू साहू को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। लेकिन उससे पहले ही EOW ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में अपराध दर्ज किया था और अभी भी रानू साहू केंद्रीय जेल रायपुर में बंद हैं ।

 

कैसा रहा सफर?

रानू साहू 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में हुआ। बचपन से ही उनकी रुचि पढ़ाई-लिखाई में थी। वह अपने स्कूल और कॉलेज की होनहार छात्रों में गिनी जाती थीं। कहा जाता है कि उन्हें पुलिस की वर्दी बहुत पसंद थी। इसलिए उन्होंने पुलिस विभाग ज्वाइन करने का सपना देखा था। रानू साहू के पति का नाम जयप्रकाश मौर्य है। वह भी IAS afsar हैं ।

2005 में बनीं डीएसपी

रानू साहू के बारे में कहा जाता है कि वह शुरू से ही पुलिस की वर्दी पहना चाहती थीं। इसलिए कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने तैयारी शुरू कर दी थी। साल 2005 में रानू साहू का सिलेक्शन डीएसपी के लिए। उन्होंने डीएसपी की नौकरी भी ज्वाइन की। उसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की।

2010 में क्लियर किया यूपीएसरी

DSP के पोस्ट पर सिलेक्शन के बाद रानू साहू ने यूपीएससी क्लियर का सपना चुना। इसके लिए उन्होंने जमकर तैयारी की। नौकरी में रहते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी की। 2010 में उन्होंने यूपीएससी क्लियर की और छत्तीसगढ़ कैडर की IAS अधिकारी बनीं। रानू साहू पहली बार कांकेर जिले की कलेक्टर बनकर पहुंची। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के कई जिलों की कलेक्टर रहीं और मंत्रालय में कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला।

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कांग्रेस सरकार में थी जिम्मेदारी

रानू साहू की गिनती उन अधिकारियों में होती है जिनका कांग्रेस की सरकार में बड़ा रसूख था। रानू साहू राज्य कृषि विभाग में निदेशक भी रहीं। हालांकि अपनी कार्यशैली के कारण वह विवादों में भी रहीं। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री जयसिंह अग्रवाल से विवाद के बाद उनकी शिकायत हुई थी। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने रानू साहू पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगाया था, लेकिन कांग्रेस सरकार ने उन सबके बावजूद उनपर कोई एक्शन नहीं लिया था ।

क्या है कोयला घोटाला?

जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी उसी दौरान कोयला घोटाला सामने आया था। ईडी ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में कई अधिकारी और कारोबारी एक संगठित गिरोह चलाकर कोयले के परिवहन में 25 रुपए प्रति टन की वसूली कर रहे हैं। इस मामले में ईडी ने पूरे छत्तीसगढ़ में ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी के अनुसार, कोयला घोटाले में कारोबारी, कांग्रेस पार्टी के नेता और कई बड़े अफसर शामिल थे। करीब 540 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला किया गया। इसी मामले में ईडी ने रानू साहू को गिरफ्तार किया था।

निलंबित IAS पर आपराधिक साजिश का आरोप

EOW ने अपनी FIR में बताया है कि रानू साहू जुलाई 2021 से जुलाई 2022 तक कलेक्टर कोरबा के रूप में पदस्थ रहीं। उन्होंने लोक सेवक के रूप में कार्य करते हुए ये संपत्तियां अर्जित की। रानू साहू ने सूर्यकांत तिवारी और उसके सिंडिकेट के सदस्यों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची।

कोयला ट्रांसपोर्टरों से डीओ और टीपी परमिट जारी किए जाने के लिए 25 रुपए प्रति टन की अवैध वसूली में सक्रिय सहयोग दिया। रानू साहू जहां भी पदस्थ रहीं हैं, वहां पर किसी न किसी माध्यम से भ्रष्टाचार कर खुद को आर्थिक रूप से समृद्ध करती रहीं है। रानू साहू को अपनी सर्विस जॉइन करने के बाद से 31.10.2022 तक की स्थिति में वेतन के रूप में लगभग 92 लाख रुपए प्राप्त होने की जानकारी है।

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3 करोड़ 93 लाख 91 हजार के निवेश की जानकारी

जबकि अब तक उनके द्वारा लगभग 3 करोड़ 93 लाख 91 हजार 949 रुपए निवेश अचल संपत्ति में करने की जानकारी मिली है। इसके अलावा रानू साहू ने अचल संपत्ति, बीमा, शेयर, एसआईपी, में भी निवेश किया है।

रानू की प्रॉपर्टी तीन भागों में बांटी- ए, बी, सी

ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने बताया था कि रानू साहू की प्रॉपर्टी को तीन भागों में बांटा गया है ए, बी और सी। ए में वो संपत्तियां हैं, जिसके जरिए रिश्तेदारों के नाम से संपत्ति खरीदी गई। बी में वे संपत्तियां हैं, जो बेनामी हैं। सी में वो प्रॉपर्टी है, जिसमें वैल्यू नहीं बताई जा सकी है, उसे मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत सीज कर सकते हैं।

रानू साहू के मायके में पड़ चुका है छापा

पिछले साल ED ने मनी लॉन्ड्रिंग और कोल अवैध वसूली मामले में रानू साहू के कलेक्टर रहते हुए छापेमारी कार्रवाई की थी। रानू साहू के मायके में ED के अधिकारियों ने दबिश दी थी। साहू के गांव पाण्डुका, गरियाबंद जिले में छापा पड़ा था। साहू के परिजन राजनीति से जुड़े हैं। जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी साहू और कांग्रेस नेता शैलेंद्र साहू के घर टीम घुसी थी। लक्ष्मी साहू कलेक्टर रानू साहू की मां हैं। वहीं शैलेंद्र साहू उनके चचेरे भाई हैं। मैनपुर में एक 12 एकड़ के तालाब के भी इस परिवार के नाम होने की जानकारी सामने आई थी, क्योंकि इसकी प्रारंभिक रजिस्ट्री में परिवार का नाम था।

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