प्रमोद मिश्रा
रायपुर,01 जून 2025

छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ एवं प्रभावशील बनाने के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों पर चरणबद्ध भर्ती की जाएगी। प्रथम चरण में 5,000 शिक्षकों की भर्ती होगी। इस निर्णय से प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन-अध्यापन व्यवस्था को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन्हीं पहलों में शामिल है शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया राज्य में शुरू कर दी गई है। इसके पूरा होने के बाद शिक्षकों के रिक्त पदों का आकलन कर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
गौरतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाने की पहल के तहत राज्य सरकार द्वारा शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूल शिक्षक विहीन और 255 स्कूल एकल शिक्षक वाले हैं। 362 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है।
शहरी क्षेत्र की बात करें तो 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है, 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20, 837 स्कूलों में 21 से 30 और 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 से अधिक है, यानी इन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है।
युक्तियुक्तकरण के तहत जिन स्कूलों में अधिक शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे एकल शिक्षक और शिक्षक विहीन स्कूलों की समस्या दूर होगी, संचालन का खर्च घटेगा और संसाधनों का अधिकतम उपयोग होगा।
एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन की जरूरत नहीं होगी। बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और ड्रॉपआउट रेट में भी गिरावट आएगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर देना आसान होगा।
शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के 10,463 स्कूलों में से केवल 166 स्कूलों का समायोजन किया जाएगा। इनमें से ग्रामीण क्षेत्र के 133 स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 से कम है और 1 किमी के दायरे में दूसरा स्कूल है। शहरी क्षेत्र में 33 स्कूलों में दर्ज संख्या 30 से कम है और 500 मीटर के भीतर दूसरा स्कूल संचालित है। इस समायोजन से बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शेष 10,297 स्कूल यथावत संचालित रहेंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए और संसाधनों का सही उपयोग हो। जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या बेहद कम है, उन्हें पास के अच्छे स्कूलों में समायोजित कर बच्चों को बेहतर माहौल और शिक्षा दी जाएगी।
युक्तियुक्तकरण से बच्चों को योग्य और विषय विशेषज्ञ शिक्षक, लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा।
यह पहल छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को न सिर्फ सशक्त बनाएगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को मजबूत आधार भी प्रदान करेगी।





