डोंगरगढ़, 28 जून 2025
कभी गोवा के बीचों पर बारटेंडर की नौकरी करने वाला तरुण अग्रवाल उर्फ बाबा कांति योगा, अब देशभर में सुर्खियों में है। योग और अध्यात्म की आड़ में वह एक ऐसा गोरखधंधा चला रहा था, जिसका जाल भारत से लेकर यूरोप तक फैला हुआ है। लेकिन अब इस हाईप्रोफाइल केस में कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा का ही ट्रांसफर कर दिया गया है, जिससे पूरा मामला और संदिग्ध हो गया है।

फार्महाउस से बरामद हुए नशा और आपत्तिजनक सामग्री
24 जून को डोंगरगढ़ पुलिस ने बाबा तरुण के फार्महाउस पर छापा मारा, जहां से करीब दो किलो गांजा और यौन गतिविधियों में उपयोग होने वाली कई आपत्तिजनक वस्तुएं जब्त की गईं। बाबा ने इसे अपने अनुयायियों की संपत्ति बताकर खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की, लेकिन उसके विदेशी लेन-देन और आलीशान संपत्ति ने पुलिस को शक के घेरे में डाल दिया।
करोड़ों में जमीन खरीद, NGO फंडिंग पर सवाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि तरुण ने 2020-21 में प्रज्ञागिरी के पास 42 एकड़ जमीन 6 करोड़ रुपये में खरीदी। दावा है कि यह राशि NGO के जरिए आई, लेकिन फंडिंग का स्रोत अब भी रहस्य बना हुआ है। उसकी वेबसाइट पर योगा पैकेज की कीमत यूरो में दर्शाई गई थी और वह गोवा के पटनेम बीच पर विदेशी नागरिकों से लाखों की फीस लेकर योग शिविर चलाता था।
विदेशी नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
तरुण ने पूछताछ में खुद को दस NGO का डायरेक्टर बताते हुए सौ देशों की यात्रा करने का दावा किया है, जिनमें अधिकांश यूरोपीय देश शामिल हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी एजेंडा फैलाने में सक्रिय हो सकता है। यदि फंडिंग के तार संदिग्ध निकलते हैं तो इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री तय मानी जा रही है।
कार्रवाई करने वाले अफसर का ट्रांसफर, उठे सवाल
बाबा के खिलाफ कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा का अचानक तबादला कर दिया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बोरतलाव थाना प्रभारी उपेंद्र शाह को लाइन अटैच करने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके उलट उपेंद्र शाह को ही डोंगरगढ़ का नया थाना प्रभारी बना दिया गया।
क्या सिस्टम में दखल दे रहा है बाबा का नेटवर्क?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बाबा तरुण इतना ताकतवर है कि उसने सिस्टम में घुसपैठ कर ली है? क्या यह सिर्फ नशा और यौन शोषण का मामला नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का हिस्सा है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं? और क्या इसी वजह से कार्रवाई करने वाले ईमानदार अफसर को हटाकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश की गई?
पुलिस की चुप्पी, जनता के मन में बेचैनी
फिलहाल पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रही है। उनका कहना है कि जांच जारी है। लेकिन सवाल अब सिर्फ बाबा की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की साख का है। अगर विदेशी फंडिंग और सिस्टम में मिलीभगत की पुष्टि होती है तो यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा तक को प्रभावित कर सकता है।
डोंगरगढ़ का यह मामला अब योग के नाम पर फैलाए जा रहे एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र, संदिग्ध फंडिंग और सिस्टम में बैठे सरंक्षकों की पोल खोल रहा है – और जनता इस पूरे खेल का सच जानना चाहती है।





