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छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047 जनता को समर्पित: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले – यह दस्तावेज नहीं, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है, 2047 तक हर क्षेत्र में होगा ऐतिहासिक बदलाव

प्रमोद मिश्रा

रायपुर, 18 जुलाई 2025

छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा और दशा तय करने वाला दिन आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047” दस्तावेज को एक भव्य कार्यक्रम में प्रदेश की जनता को समर्पित किया। नवा रायपुर के अटल नगर में आयोजित इस समारोह में राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, नीति आयोग के अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, वरिष्ठ अफसर और सैकड़ों जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह विजन सिर्फ कागजों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संकल्प है, एक स्पष्ट दिशा है और विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत@2047 के सपने से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज हमें एक अग्रणी राज्य की ओर ले जाने वाली प्रकाश-पुंज है। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि छत्तीसगढ़ उन कुछ गिने-चुने राज्यों में से है, जिन्होंने इतनी व्यापक, सहभागी और दूरदर्शी योजना को जनता के सामने प्रस्तुत किया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस दस्तावेज को बनाने में केवल सरकारी मशीनरी या विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि जनता की सीधी भागीदारी रही है। संभाग स्तरीय जनसंवाद, वर्किंग ग्रुप्स और ‘मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़’ पोर्टल के माध्यम से हज़ारों सुझाव प्राप्त हुए, जो विजन डॉक्यूमेंट का आधार बने। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई नीति आयोग की बैठक में जब उन्होंने इस दस्तावेज की प्रस्तुति दी, तो उसे विशेष सराहना मिली।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने इस राज्य की नींव रखी और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह राज्य तेज़ी से आगे बढ़ा है। अब जब छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के रजत जयंती और अटल निर्माण वर्ष मना रहा है, ऐसे समय में यह विजन समर्पित किया जाना अत्यंत सार्थक और भावनात्मक क्षण है। उन्होंने इसे तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के सपनों और संकल्पों का साझा दस्तावेज बताया।

मुख्यमंत्री ने अपनी बातों में ज़ोर देते हुए कहा कि अगर रास्ता साफ हो, सोच बड़ी हो और भागीदारी मजबूत हो, तो विकास रुक नहीं सकता। यही सोच हमें आत्मनिर्भरता और समृद्धि की ओर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि मोदी जी से हमने ऊँचे लक्ष्य रखना और कठोर मेहनत करना सीखा है। पहले कहते थे “मोदी हैं तो मुमकिन है”, अब कहते हैं “मोदी हैं तो निश्चित है”। 2047 तक का यह लक्ष्य अब हमारी साझी दिशा है।

इस विजन डॉक्यूमेंट में छत्तीसगढ़ को भारत का पावर हाउस बनाने की बड़ी योजना सामने आई है। स्टील उत्पादन को वर्ष 2030 तक 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि जम्मू-कश्मीर के चिनाब नदी पर बने भारत के सबसे ऊँचे पुल में छत्तीसगढ़ के स्टील का उपयोग हुआ है। कोयला उत्पादन को 207 से बढ़ाकर 437 मिलियन टन और आयरन ओर उत्पादन को 46 से बढ़ाकर 100 मिलियन टन करने की योजना है। विद्युत उत्पादन को भी वर्तमान 30 हजार मेगावाट से बढ़ाकर भारत के शीर्ष पर ले जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जिसने लिथियम खनिज ब्लॉक की सफल नीलामी की है।

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लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को भी राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1853 से 2014 तक छत्तीसगढ़ में सिर्फ 1100 किलोमीटर रेलमार्ग बने थे, जिसे 2030 तक दोगुना किया जाएगा। बोधघाट परियोजना जैसे जल-विद्युत संयोजन इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि यह विजन 2030 तक अल्पकालिक, 2035 तक मध्यकालिक और 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ एक ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करता है।

राज्य के विकास के लिए 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के ज़रिए संतुलित और समावेशी विकास का खाका तैयार किया गया है। इसमें कृषि, जैविक खेती, आईटी, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। रायपुर की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की गई है, जिससे ई-कॉमर्स को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी को वर्ष 2030 तक 11 लाख करोड़ और 2047 तक 75 लाख करोड़ तक पहुंचाया जाएगा। किसानों की आय में 10 गुना वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। कृषि उन्नति मिशन, जैविक खेती और निर्यात आधारित योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया जाएगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े बदलावों की घोषणा की गई। आयुष्मान भारत योजना के तहत अभी तक 87 प्रतिशत आबादी को कवर किया गया है, जिसे 100 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। नवा रायपुर में एक बड़ी मेडीसिटी, बस्तर और सरगुजा में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कई मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में अब राज्य में कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं है। पांच हज़ार शिक्षकों की भर्ती, 1000 पीएम-श्री स्कूल, 36 आदर्श कॉलेज और एक ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की जा रही है।

रोजगार के मोर्चे पर भी राज्य सरकार की योजनाएं महत्वाकांक्षी हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में बेरोजगारी दर मात्र 2.7 प्रतिशत है और 2047 तक इसे घटाकर 1 प्रतिशत से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। आईआईटी जैसे संस्थानों के सहयोग से कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर प्लांट, एआई डाटा सेंटर और आईटी हब की स्थापना की जा रही है। पिछले डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक प्रशासनिक और नीतिगत सुधार किए गए हैं और 6.75 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

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सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के ज़रिए अब उद्योगों को ऑनलाइन एक क्लिक पर मंजूरी दी जा रही है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और बस्तर व सरगुजा जैसे क्षेत्रों में होम स्टे और ईको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में जहां 2 करोड़ पर्यटक आते हैं, वहीं 2047 तक 10 करोड़ पर्यटकों को लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण विकास की आत्मा है। राज्य का 44 प्रतिशत वन क्षेत्र देश के ऑक्सीजन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। बस्तर के कलागुड़ा में प्लास्टिक कचरे से बनाई गई सड़कों जैसे नवाचार सर्कुलर इकोनॉमी की मिसाल बन रहे हैं। उन्होंने खनन से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि पिछले 45 वर्षों में मात्र 28,700 हेक्टेयर वनभूमि एफसीए के तहत परिवर्तित हुई है, जिसमें भी असली कटाई केवल 0.11 प्रतिशत हिस्से में हुई। वहीं, इसी दौरान 68,300 हेक्टेयर वन क्षेत्र की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने CSR और DMF के ज़रिए हुए कार्यों को “नया उजाला” बताया और कहा कि अब नागरिक सहभागिता पोर्टल के ज़रिए हर योजना में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की। मंच पर नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रीगण रामविचार नेताम, दयालदास बघेल, केदार कश्यप, श्याम बिहारी जायसवाल, लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, नीति आयोग के CEO बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम, मुख्य सचिव एवं राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष अमिताभ जैन, योजना विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं।

कार्यक्रम में वित्त एवं योजना मंत्री ओ.पी. चौधरी ने विजन डाक्यूमेंट की संरचना और रणनीति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दस्तावेज न केवल राज्य की आर्थिक विकास की रूपरेखा है, बल्कि इसमें जनसामान्य की आकांक्षाएं और भविष्य की दिशा भी स्पष्ट रूप से शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह दृष्टिपत्र छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों में स्थान दिलाने की ठोस रणनीति है, जिसमें हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी सबसे जरूरी है।

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By Desk

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