बिलासपुर, 08 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से सरकारी स्कूल में घोटाले और लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बेलतरा के शासकीय हाई स्कूल भवन से खिड़की, दरवाजे, चैनल गेट, रेलिंग और टाइल्स समेत लाखों रुपये का सामान कथित रूप से पूर्व सरपंच के पति रामरतन कौशिक द्वारा उखाड़ कर अपने घर ले जाने का आरोप है। खास बात यह है कि यह सब कुछ स्कूल की प्रभारी प्राचार्य कावेरी यादव की मौखिक सहमति से हुआ, लेकिन विभाग के अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी तक नहीं दी गई। अब इस मामले में प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सरपंच पति पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

सरकारी स्कूल बना खंडहर
राज्य शासन द्वारा करीब 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस हाई स्कूल भवन को कुछ साल पहले ही तैयार किया गया था और वहां नियमित कक्षाएं भी संचालित हो रही थीं। लेकिन एक साल पहले “मरम्मत” के बहाने स्कूल प्रबंधन ने भवन को खाली करा दिया और कक्षाएं पास की दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट कर दी। इसी दौरान स्कूल भवन से दरवाजे, खिड़कियां, रेलिंग और टाइल्स गायब हो गए।
ग्रामीणों ने खोला घोटाले का पर्दाफाश
जब स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल भवन की बदहाल स्थिति देखी, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने जब पड़ताल की तो सामने आया कि तत्कालीन सरपंच ईश्वरी बाई कौशिक के पति रामरतन कौशिक ने स्कूल से चार लोहे के दरवाजे, 24 खिड़कियां, 16 रेलिंग, 8 रोशनदान, 2 चैनल गेट और टाइल्स उखाड़कर अपने घर ले गए। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की।
प्राचार्य की चुप्पी ने बढ़ाया संदेह
जांच में सामने आया कि प्राचार्य कावेरी यादव ने इस पूरी कार्रवाई को मौन स्वीकृति दी थी। उन्होंने न तो उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी और न ही पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराई।
डीपीआई ने की कार्रवाई
लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रभारी प्राचार्य कावेरी यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके आचरण को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन माना गया है।
निलंबन अवधि में कावेरी यादव का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिल्हा निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
आरोपी बोले- मुझे बदनाम किया जा रहा
वहीं, आरोपी सरपंच पति रामरतन कौशिक ने कहा कि “स्कूल जर्जर हालत में था, इसलिए मैंने खिड़की-दरवाजे निकलवाए थे, लेकिन बाद में सामान स्कूल को ही लौटा दिया गया। मुझे जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। जांच में मैंने बयान भी दिया है।”
हालांकि अब तक उनके खिलाफ कोई FIR या सख्त कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।





