प्रमोद मिश्रा
रायपुर/बालेंगा, 22 सितंबर 2025

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में नक्सली हमले में बस्तर का लाल शहीद हो गया। असम राइफल्स के जवान रंजीत कुमार कश्यप का पार्थिव शरीर रविवार को विमान से रायपुर लाया गया, जहाँ उन्हें रायपुर एयरपोर्ट पर जवानों ने श्रद्धांजलि और सलामी अर्पित की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए आने वाले थे, लेकिन विभिन्न कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। एयरपोर्ट से शहीद का पार्थिव शरीर एम्स रायपुर भेजा गया, और वहां से उन्हें बस्तर जिले के बालेंगा गांव ले जाया गया।
शहीद रंजीत कुमार कश्यप के बारे में
रंजीत कुमार कश्यप बालेंगा गांव के रहने वाले थे। वे 2016 में असम राइफल्स में भर्ती हुए थे। ग्रामीणों और दोस्तों के अनुसार, रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आए थे और करीब एक महीने तक अपने परिवार के साथ रहे। 14 सितंबर को वे फिर ड्यूटी पर लौटे।
गांव के दोस्तों ने बताया कि रंजीत ने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं, उसके बाद वह रिटायर होकर गांव लौटकर अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनेंगे। लेकिन दुर्भाग्यवश अब वह हमारे बीच नहीं हैं।
शहीद रंजीत अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उन्होंने माता-पिता, पत्नी और तीन बेटियों को पीछे छोड़कर देश की सेवा में शहादत दी। उनकी बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई है। शहादत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर फैल गई।
हमला कैसे हुआ
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में आतंकियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में एक ऑफिसर और रंजीत कुमार कश्यप शहीद हो गए। इसके अलावा तीन अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है।
शहीद को दी गई अंतिम श्रद्धांजलि
रायपुर एयरपोर्ट और बालेंगा गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद रंजीत कुमार कश्यप को अंतिम विदाई दी गई। ग्रामीणों और जवानों ने फूल अर्पित कर, सलामी देकर और भावपूर्ण श्रद्धांजलि दे कर उन्हें सम्मानित किया।
रंजीत कुमार कश्यप की शहादत से न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में मातृभूमि के लिए देशभक्ति की भावना और सम्मान की मिसाल कायम हुई है।





