मनीला (फिलीपींस), 08 नवम्बर 2025।
भारत की गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स को प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार संस्था को भारत की लाखों बालिकाओं की शिक्षा में असाधारण परिवर्तन लाने और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से शिक्षा को जन-आंदोलन में बदलने के लिए प्रदान किया गया है। एजुकेट गर्ल्स यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय संस्था बन गई है।

संस्था ने यह पुरस्कार अपने 55,000 टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड कोऑर्डिनेटर्स और स्थानीय युवा सलाहकारों को समर्पित किया है, जो हर दिन यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि भारत की हर बालिका को शिक्षा का अधिकार और अवसर मिल सके।
2007 में स्थापित एजुकेट गर्ल्स ने बीते दो दशकों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के 30,000 से अधिक गांवों में कार्य करते हुए 20 लाख से अधिक बालिकाओं का स्कूल में नामांकन कराया है। इसके अलावा संस्था के उपचारात्मक शिक्षण कार्यक्रम से 24 लाख से अधिक बच्चों की शिक्षा में सुधार हुआ है।
संस्थापिका सफीना हुसैन ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा —
“यह सम्मान उन बालिकाओं के नाम है जो अपने साहस और दृढ़ निश्चय से हर दिन हमें प्रेरित करती हैं। यह उन माता-पिता, शिक्षकों और स्वयंसेवकों के नाम भी है, जिन्होंने बालिका शिक्षा को सामाजिक आंदोलन बनाया है। जब समुदाय एकजुट होता है, तब हर लड़की को अपनी आवाज़ और पहचान मिलती है।”
पुरस्कार समारोह 7 नवम्बर 2025 को मनीला (फिलीपींस) के मेट्रोपॉलिटन थिएटर में आयोजित हुआ। एजुकेट गर्ल्स की 25 सदस्यीय टीम, जिसमें स्वयंसेवक, फील्ड कोऑर्डिनेटर्स और प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी शामिल थे, इस अवसर पर मौजूद रही।
सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा —
“यह पुरस्कार हमें हमारे अगले लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है — वर्ष 2035 तक 1 करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुंचना। यह साबित करता है कि जब समुदाय, सरकारें और दानदाता साथ आते हैं, तो शिक्षा के क्षेत्र में असंभव भी संभव हो जाता है।”
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार समिति ने एजुकेट गर्ल्स को “बालिकाओं और युवतियों की शिक्षा के माध्यम से सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने, निरक्षरता से मुक्त करने और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना जगाने” के लिए सम्मानित किया।
संस्था के वरिष्ठ सदस्य अब्दुर रहमान, जो 2010 में एजुकेट गर्ल्स के पहले कर्मचारी के रूप में जुड़े थे, ने कहा —
“पाली जिले के गांवों से शुरू हुई यह यात्रा आज वैश्विक मंच पर पहुंची है। टीम बालिका स्वयंसेवक हमारे आंदोलन की रीढ़ हैं।”
कार्यालय सहायक बालू गवांडे, जिन्होंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान लेकर समारोह में भाग लिया, ने कहा —
“दो बेटियों के पिता के रूप में यह मिशन मेरे लिए बेहद खास है। यह क्षण गर्व और सम्मान से भरा हुआ है।”
एजुकेट गर्ल्स ने एयर इंडिया का आभार व्यक्त किया, जिसने पहली बार अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले स्वयंसेवकों और शिक्षार्थियों के लिए मनीला तक की उड़ानें प्रायोजित कीं।
एजुकेट गर्ल्स के बारे में
यह संस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम, समग्र शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और उल्लास कार्यक्रम के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा को सशक्त बना रही है।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार के बारे में
यह पुरस्कार एशिया में “मानवता की महानता और प्रेरक नेतृत्व” के उत्सव के रूप में जाना जाता है और हर वर्ष गुप्त नामांकन प्रक्रिया के बाद चयनित व्यक्तियों या संस्थाओं को प्रदान किया जाता है।
👉 एजुकेट गर्ल्स ने यह सम्मान भारत की हर उस बालिका को समर्पित किया है, जो सपनों को साकार करने के लिए शिक्षा को अपना अधिकार बना रही है।





