नई दिल्ली, 18 नवंबर 2025
दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके की जांच में जम्मू-कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद का नाम सामने आया है। आरोप है कि इरफान अहमद ने डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाया और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से संपर्क करवाया। जांच में विस्फोटक सामग्री और हथियार बरामद होने से यह साफ हो गया कि मौलवी ने ही दिल्ली ब्लास्ट की स्क्रिप्ट लिखी थी।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हरियाणा के फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने वाले मुजामिल शकील और उमर ने मौलवी इरफान से 2023 में संपर्क किया। इस दौरान मौलवी ने इन डॉक्टरों को चरमपंथी बनाने के लिए ट्रेनिंग और नेटवर्किंग करवाई। इसके बाद इन डॉक्टरों ने अपने साथियों को भी मौलवी से मिलवाया और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप के जरिए कट्टरपंथ फैलाया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने डॉक्टरों को दो असॉल्ट राइफल्स मुहैया कराईं। इनमें से एक राइफल शाहिना सईद की कार में मिली, जिसका कोड नेम ‘मैडम सर्जन’ है। यह महिला जैश की महिला शाखा जमीयत उलेमा-ए-हिंद की सदस्य मानी जा रही है।
एक और हथियार श्रीनगर के जीएमसी से, डॉक्टर आदिल अहमद राठेर के लॉकर से बरामद हुआ। राठेर की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक राठेर जम्मू-कश्मीर के नौगाम में जैश के समर्थन में पोस्टर लगाते हुए CCTV में कैद हुआ था।
इस मामले में शकील की गिरफ्तारी के साथ ही विस्फोटक बरामद हुए और सईद की पहचान हुई। जांच अब भी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि मौलवी इरफान अहमद ने पूरी साजिश की नींव रखी।





