प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 20 नवंबर 2025: भारतीय खनिज उद्योग महासंघ (एफआईएमआई) ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को बजट 2026–27 से पहले महत्वपूर्ण सिफारिशें भेजीं, जिनमें घरेलू एल्युमीनियम उद्योग की सुरक्षा के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता जताई गई है। महासंघ ने प्राथमिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15% करने की सिफारिश की है, ताकि आयात में तेज़ी से हो रही वृद्धि को रोका जा सके और घरेलू विनिर्माण को संरक्षण मिल सके।

एफआईएमआई के अनुसार, हाल के वर्षों में चीन, रूस, आसियान और मध्य पूर्व से एल्युमीनियम आयात में तेज़ी आई है। वित्त वर्ष 2026 में भारत की कुल एल्युमीनियम मांग का लगभग 55% आयात से पूरा होने का अनुमान है। साथ ही, कम गुणवत्ता वाले एल्युमीनियम स्क्रैप के बढ़ते आयात ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा आयातक बना दिया है। महासंघ ने स्क्रैप के लिए भी भारत में वैश्विक मानकों के अनुरूप गुणवत्ता मानक लागू करने की मांग की है।
देश में एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अब तक 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है और 1.6 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश की योजना में है। इससे 8 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की उम्मीद है। एफआईएमआई ने लागत दबाव को कम करने के लिए एल्युमीनियम उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी घटाने की भी सिफारिश की।
एफआईएमआई का मानना है कि इन उपायों को लागू करने से खनिज और धातु क्षेत्र में निवेश, रोजगार और उत्पादन बढ़ेगा और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।



