प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 11 दिसंबर 2025

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी है। मामला कवर्धा के दंपती का है, जहां पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी ने शादी से पहले अपनी गंभीर मेडिकल स्थिति—10 साल से बंद माहवारी—की जानकारी छुपाई, जिसे कोर्ट ने मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक को उचित ठहराया।
▶ जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति-पत्नी के बीच संबंधों में सुधार की कोई संभावना नहीं बची है।
कोर्ट ने तलाक के आदेश को कायम रखते हुए पति को निर्देश दिया है कि वह 4 महीने के भीतर पत्नी को 5 लाख रुपए स्थायी भरण-पोषण के रूप में दे।
कवर्धा निवासी दंपती की शादी 5 जून 2015 को हुई थी। शुरुआती कुछ महीने संबंध सामान्य रहे, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने लगे।
- पत्नी ने एक दिन बताया कि उसकी माहवारी रुक गई है।
- डॉक्टर के पास ले जाने पर खुलासा हुआ कि पिछले 10 साल से पीरियड्स नहीं आ रहे थे।
- आगे की जांच में पता चला कि गर्भधारण में गंभीर समस्या है।
- पति का आरोप—पत्नी और उसके परिवार ने यह जानकारी जानबूझकर शादी से पहले छुपाई।
- घर के बुजुर्गों की जिम्मेदारी उठाने में पत्नी को आपत्ति थी, वह ताने देती थी—“क्या अनाथालय खोल रखा है?”
- परिवार के सदस्यों के लिए खाना बनाने से इंकार।
- पत्नी के भाई को 40 हजार रुपए न देने पर पत्नी का पति से बात करना छोड़ देना।
- मजबूरी में पति को 40 हजार रुपए ट्रांसफर करने पड़े।
- दहेज में उसके पिता ने टीवी, फ्रिज, एसी, वॉशिंग मशीन, सोफा, बेड, और गहने दिए थे।
- शादी के बाद घर की नौकरानी को हटाकर सभी घरेलू काम उन्हीं से करवाए गए।
- उसे ‘बांझ’ कहकर प्रताड़ित किया जाता था।
- मेडिकल समस्या अस्थायी थी और डॉक्टरों ने सुधार की संभावना बताई थी।
फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया था। पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने माना कि
शादी से पहले गंभीर मेडिकल जानकारी छुपाना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है।
हाईकोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए तलाक को वैध ठहराया और भरण-पोषण की राशि तय की।



