प्रमोद मिश्रा
रायपुर | 31 दिसंबर 2025

झारखंड के गुमला जिले में आयोजित अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में छत्तीसगढ़ की जनजातीय मातृशक्ति ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और ‘जशक्राफ्ट’ के उत्पादों की खुले मंच से सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि जशपुर की महिलाएं जिस तरह पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ रही हैं, वह महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है। कोटानपानी गांव की वन प्रबंधन समिति से जुड़ी महिलाओं द्वारा बनाए गए आभूषण और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को उन्होंने जनजातीय सृजनशीलता का प्रेरक प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, जो इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए, ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा जशपुर की बहनों की प्रशंसा किया जाना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा,
“जशक्राफ्ट से जुड़ी बहनों के हाथों से बने आभूषण और हस्तशिल्प हमारी सांस्कृतिक विरासत और महिला शक्ति की जीवंत मिसाल हैं। यह आत्मनिर्भर भारत और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करता है।”
मुख्यमंत्री ने जशपुर की समस्त जनजातीय बहनों की ओर से राष्ट्रपति के प्रति आभार भी जताया।
कार्यक्रम में जनजातीय हस्तशिल्प, लोककला और स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी लगाई गई। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि दल ने जशपुर की विशिष्ट शिल्प परंपरा को देश के सामने प्रस्तुत किया, जिससे जनजातीय सशक्तिकरण का मजबूत संदेश गया।
राष्ट्रपति ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि
“जनजातीय परंपराओं और पहचान को सहेजते हुए नई पीढ़ी को विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहिए।”
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में बस्तर की बदली तस्वीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि
“आज बस्तर में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा पहुंच चुकी है। 400 से ज्यादा गांव नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं। नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।”
उन्होंने बताया कि पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को नई दिशा दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा को जनजातीय गौरव का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी प्रेरणा आज भी आदिवासी समाज को आत्मसम्मान से भर रही है। उन्होंने कार्तिक उरांव जैसे जननायकों के योगदान को भी याद किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि झारखंड और छत्तीसगढ़ का गठन अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है और आज दोनों राज्य अपनी पहचान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह सांस्कृतिक समागम शांति, समृद्धि और नक्सलवाद के अंत की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।





