बिलासपुर, 11 फ़रवरी 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हुए बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन में अदम्य साहस दिखाने वाले पुलिस जवानों की आउट ऑफ टर्न प्रमोशन (असामान्य पदोन्नति) के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता जवानों के लंबित प्रतिनिधित्व पर कानून के अनुरूप दो माह के भीतर निर्णय लें।

यह आदेश न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने दीपक कुमार नायक व अन्य बनाम राज्य शासन प्रकरण में पारित किया।
याचिकाकर्ता दीपक कुमार नायक, अग्नु राम कोर्राम और संगीत भास्कर वर्तमान में कांकेर जिले में पदस्थ हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि वे 15-16 अप्रैल 2024 को बीएसएफ के साथ संयुक्त रूप से चलाए गए बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन का हिस्सा थे। यह ऑपरेशन कांकेर जिले के कालपर-हापाटोला-छेटेबेठिया क्षेत्र में संचालित किया गया था।
इस दौरान सुरक्षा बलों और 40-50 सशस्त्र माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें 29 नक्सली मारे गए। इनमें 15 पुरुष और 14 महिला नक्सली शामिल थीं। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस सफल ऑपरेशन में कुल 187 पुलिसकर्मी शामिल थे, लेकिन शासन द्वारा केवल 54 पुलिसकर्मियों को ही पुलिस विनियम 70(क) के तहत आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का लाभ दिया गया। जबकि वे भी समान परिस्थितियों में अभियान का हिस्सा थे।
खुद को इस लाभ से वंचित किए जाने पर उन्होंने 25 जून 2025 को बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया था, जो अब तक लंबित है।
हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि मामला सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए इस स्तर पर सीधे पदोन्नति का आदेश देना उचित नहीं होगा। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस महानिदेशक याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर पुलिस विनियम 70(क) के तहत निष्पक्ष और कानूनसम्मत निर्णय लें।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का मामला उन 54 पदोन्नत जवानों के समान पाया जाता है, तो उनकी आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की प्रक्रिया भी शुरू की जाए।
यह आदेश नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी निभाने वाले जवानों के मनोबल और पारदर्शी पदोन्नति प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





