प्रमोद कुमार
रायपुर, 14 मार्च 2026। राजधानी में दो दिवसीय जनजातीय महोत्सव ‘आदि परब’ का रंगारंग आगाज हो गया। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकार अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं की झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। इस वर्ष आदि परब की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है, जिसका उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है।

नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी ने किया। इस अवसर पर राज्य अंत्यावसायी आयोग के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेहरा, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, टीआरटीआई के संचालक हिना अनिमेष नेताम, गायत्री नेताम सहित कई अधिकारी और बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जनजातीय समाज के युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में रैंप शो कर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का आकर्षक प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने उत्साह के साथ सराहा। इसके साथ ही जनजातीय खान-पान, वेशभूषा और पारंपरिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
महोत्सव में “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” और “आदि हाट – जनजातीय शिल्प मेला” का भी आयोजन किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
कार्यक्रम का समापन 14 मार्च को होगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम सहित जनजातीय समाज के पदाधिकारी और कई जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।





