सतीश शर्मा
रायपुर, 15 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रही योजनाएं अब ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रही हैं। गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लालपुर की हमेश्वरी राठौर इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरी हैं, जो आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
एक साधारण ग्रामीण महिला से सफल उद्यमी बनने तक का उनका सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। वे “रिद्धी-सिद्धी स्वसहायता समूह” से जुड़ीं, जहां उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला। समूह के माध्यम से उन्हें 5.50 लाख रुपये का ऋण मिला, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
इस राशि से उन्होंने सब्जी उत्पादन का काम शुरू किया और टमाटर, गोभी, अदरक, बरबट्टी व हल्दी जैसी फसलों की खेती करने लगीं। साथ ही सेंटरिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया, जिससे उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत बने।
शुरुआत में मौसम की मार, बाजार की दिक्कतें और लागत जैसी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन सरकारी योजनाओं के मार्गदर्शन और समूह के सहयोग से उन्होंने हार नहीं मानी। मेहनत और दृढ़ निश्चय के दम पर उन्होंने हर बाधा को पार किया।
आज उनकी सालाना आय करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे “लखपति दीदी” बन गई हैं। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि वे आसपास की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
हमेश्वरी राठौर की कहानी यह साबित करती है कि राज्य सरकार की महिला-केंद्रित योजनाएं और स्वसहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाकर उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं।



