गुवाहाटी। असम की राजनीति में एक बार फिर इतिहास दोहराया गया है, जब Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह सफर किसी साधारण राजनीतिक यात्रा की कहानी नहीं, बल्कि गुवाहाटी के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से शुरू होकर राज्य की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचने वाली लंबी राजनीतिक तपस्या का परिणाम है।

कॉटन कॉलेज, जो पूर्वोत्तर भारत की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, ने हिमंत सरमा के नेतृत्व को शुरुआती दिशा दी। छात्र जीवन में ही उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और धीरे-धीरे छात्रसंघ से लेकर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में अपनी पहचान मजबूत की।
राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से हुई, जहां वे लंबे समय तक मंत्री और रणनीतिकार रहे। बाद में राजनीतिक मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल होकर नया अध्याय शुरू किया। Narendra Modi और भाजपा नेतृत्व के साथ उनका जुड़ाव राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया।
2016 में भाजपा-नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत में उनकी अहम भूमिका रही, और 2021 में वे पहली बार मुख्यमंत्री बने। अब 2026 में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि सरमा की राजनीति संगठन क्षमता, चुनावी रणनीति और प्रशासनिक सख्ती पर आधारित रही है, जिसने उन्हें असम की राजनीति का केंद्रीय चेहरा बना दिया है। कॉटन कॉलेज से शुरू हुई यह यात्रा अब राज्य के विकास मॉडल और भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।



