इस्लामाबाद, 07 जुलाई 2026
सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को लेकर भारत के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ती दिखाई दे रही है। पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि देश को सिंधु नदी प्रणाली के तहत मिलने वाले पानी के “वाजिब हिस्से” को सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद पर ठोस और अपरिवर्तनीय कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई कोर कमांडरों की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, भारत-पाक संबंधों और सिंधु जल विवाद पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि पाकिस्तान सरकार के निर्देशों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सेना देश के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इन्हीं फैसलों में 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। यह समझौता सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करता है और दशकों तक दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार रहा है।
बैठक में पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान से सक्रिय चरमपंथी संगठनों पर भी चिंता जताई और कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए अभियान जारी रहेंगे। साथ ही सेना ने अपनी युद्धक तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्हें संतोषजनक बताया।
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर जारी यह विवाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। फिलहाल नई दिल्ली अपने रुख पर कायम है, जबकि पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है।




