बिलासपुर, 20 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश से मौत के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि हड़पने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए SDM कार्यालय और तहसील कार्यालय के तीन बाबुओं को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने पर और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य के अनुसार, मामले की जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति की फांसी लगाकर आत्महत्या के मामले के मर्ग नंबर का दुरुपयोग कर उसे सर्पदंश से मौत का मामला दिखाया गया। इसी आधार पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि का फर्जी दावा किया गया।
जांच में तहसील कार्यालय के बाबू हरिशंकर राठौर, SDM कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक और गरीब बिंझवार की भूमिका सामने आने पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी प्रकरण तैयार कर कलेक्टोरेट में प्रस्तुत किया और सरकारी मुआवजे की राशि हड़प ली।
कलेक्टर के निर्देश पर जिले में सर्पदंश से मौत के मामलों की जांच कराई गई, जिसमें 15 फर्जी प्रकरण सामने आए। इसके आधार पर जिले के अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए। इससे पहले तोरवा पुलिस भी एक डॉक्टर और एक वकील समेत पांच लोगों को इसी घोटाले में गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिस मर्ग नंबर का इस्तेमाल फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने में किया गया था, वह वास्तव में आत्महत्या के एक पुराने मामले का था, जिसे पहले ही बंद किया जा चुका था। वहीं जिस व्यक्ति के नाम पर सरकारी सहायता राशि ली गई, उसकी पहचान भी संदिग्ध निकली है। अब तक जांच में उसका नाम और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। यदि जांच में और सबूत मिले तो आने वाले दिनों में अतिरिक्त गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।





