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कृष्ण जन्माष्टमी पर कर्मयोग की मिसाल: प्रेमलाल साहू ने किया 50वां रक्तदान, 19 साल की उम्र में शुरू की थी सेवा

रायपुर, 04 सितम्बर 2026। भगवान श्रीकृष्ण के कर्मयोग के संदेश को जीवन में उतारते हुए बेमेतरा जिले के श्यामपुर कांपा गांव निवासी 34 वर्षीय प्रेमलाल साहू ने कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर अपना 50वां रक्तदान किया। 19 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ उनका रक्तदान का सफर 15 वर्षों में 50वें पड़ाव तक पहुंच गया है।

प्रेमलाल साहू के लिए रक्तदान अब केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प बन चुका है। वे अपने जन्मदिन के साथ-साथ किसी खास व्यक्ति के जन्मदिन पर भी रक्तदान करना सेवा का हिस्सा मानते हैं। उनका मानना है कि अपने लिए खुशियां मनाने के साथ किसी जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद जगाना ज्यादा सार्थक है।

साहू कहते हैं कि रक्तदान उनके लिए केवल रक्त देने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गीता के कर्मयोग को जीवन में उतारने का माध्यम है। भगवान श्रीकृष्ण के संदेश “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” से प्रेरणा लेते हुए वे मानते हैं कि व्यक्ति का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके परिणाम की चिंता किए बिना सेवा करते रहना चाहिए।

उनके अनुसार, रक्तदान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें जाति, धर्म, पहचान या परिचय नहीं, सिर्फ इंसानियत मायने रखती है। रक्तदाता को यह भी पता नहीं होता कि उसका रक्त किस व्यक्ति के जीवन को बचाने में काम आएगा। इसके बावजूद बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के रक्तदान करने से मिलने वाला संतोष ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

प्रेमलाल कहते हैं, “रक्त की कुछ बूंदें किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में उम्मीद बन जाएं, इससे बड़ी संतुष्टि क्या हो सकती है।”

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उन्होंने अपने 50वें रक्तदान के अवसर पर स्वस्थ और पात्र लोगों से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना है कि रक्तदान के लिए किसी पहचान या परिचय की जरूरत नहीं होती, बल्कि जरूरतमंद के प्रति इंसानियत और सेवा का भाव ही पर्याप्त है।

प्रेमलाल साहू की यह पहल न केवल नियमित रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि जन्मदिन और विशेष अवसरों को सेवा से जोड़ने का प्रेरणादायी संदेश भी देती है।

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