बिलासपुर, 6 अक्टूबर। अरपा नदी में बढ़ते प्रदूषण और शहर में सीवरेज प्रबंधन को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के सभी नालों के सीवरेज को प्रभावी तरीके से एसटीपी तक पहुंचाने और ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने के संबंध में शासन से विस्तृत जानकारी मांगी है।
चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शासन को नया शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्या शहर के करीब 70 नालों से निकलने वाले सीवरेज का पानी केवल चार एसटीपी के माध्यम से पूरी तरह साफ किया जा सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।

शहर में रोज 72.20 एमएलडी सीवरेज
शासन की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत शपथ पत्र के अनुसार, बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की आबादी करीब 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में प्रतिदिन लगभग 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पन्न होता है, जिसे सीवरेज नेटवर्क और करीब 70 नालों के माध्यम से चैनलाइज किया जाता है।

वर्तमान में शहर में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता 78 एमएलडी है, लेकिन फिलहाल करीब 43.90 एमएलडी क्षमता का ही उपयोग हो रहा है।
दो नए एसटीपी निर्माणाधीन
शासन ने कोर्ट को बताया कि 16-16 एमएलडी क्षमता वाले दो एसटीपी निर्माणाधीन हैं। इनमें से एक एसटीपी ट्रायल रन के चरण में पहुंच चुका है, जबकि दूसरे के 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
दोनों नए एसटीपी शुरू होने के बाद शहर की कुल सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी, जो वर्तमान अनुमानित 72.20 एमएलडी सीवरेज उत्पादन से अधिक है।
कोर्ट ने पूछा- क्या सभी नाले एसटीपी से जुड़े हैं?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रशासन से अहम सवाल किया कि क्या नगर निगम क्षेत्र के सभी 70 नालों का सीवरेज वास्तव में एसटीपी तक पहुंच रहा है या नहीं।
डिवीजन बेंच ने अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को नया एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि सभी 70 नाले उपलब्ध छह एसटीपी से कनेक्टेड और कवर हैं या नहीं।
इसके अलावा प्रत्येक नाले से निकलने वाले सीवरेज को प्रभावी ढंग से इंटरसेप्ट, डायवर्ट और ट्रीट किए जाने की स्थिति की भी जानकारी देनी होगी।
अतिरिक्त एसटीपी की जरूरत पर भी मांगी जानकारी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि अतिरिक्त एसटीपी की आवश्यकता है तो शासन को उनकी क्षमता, स्थान, निर्माण की समय-सीमा और अरपा नदी में पानी छोड़े जाने से पहले उसका पूर्ण ट्रीटमेंट सुनिश्चित करने के उपायों की जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने शासन के शपथ पत्र को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।



