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दुखद : बुलंदशहर में साधुओं की हत्या पर संत समाज मे नाराजगी, महराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की घटना को बताया निंदनीय, सरकार से कठोर कार्यवाही की मांग

सतीश शर्मा, बलौदाबाजार, 29 अप्रैल

 

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सोमवार की रात मंदिर परिषद में दो साधुओं की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई ये साधु यहां अस्थाई तौर पर निवास करते थे। साधुओं की हत्या पर दुख ब्यक्त करते हुए श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर महंत रामसुंदर दास ने कहा है कि हत्या तो आखिर हत्या है चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामूहिक किसी भी व्यक्ति को हत्या जैसे जघन्य अपराध में संलिप्त होने पर बक्शा नहीं जा सकता, जितनी जल्दी हो सके अपराधियों को सलाखों के पीछे ले जाना ही चाहिए । यह बातें श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास महाराज ने देश में घटित दो भिन्न राज्यों के अलग -अलग घटनाओं में सन्तों की हत्या पर अपना विचार अभिव्यक्त करते हुए कही । उन्होंने कहा कि बुलंदशहर की हत्याकांड में संलिप्त अपराधी का संबंधित पुलिस के जिम्मेदार जांच अधिकारी द्वारा नशे की हालत में होना बताया जाना समझ के परे हैं, जब संपूर्ण भारतवर्ष में प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार लॉक डाउन चल रहा हैं। जिसमें मादक पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध हैं, ऐसे हालात में संबंधित हत्यारे के पास नशीले पदार्थ कहां से आएंगे? जांच तथ्यपरक होनी चाहिए। हत्या जैसा जघन्य अपराध किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं हैं इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम ही है। पूरा देश पालघर में संतों की हत्या से आहत हुआ हैं, अभी यह आग ठंडी भी नहीं हुई है कि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आया है जो अत्यंत ही दुर्भाग्य जनक है। घटना चाहे महाराष्ट्र में हो या उत्तर प्रदेश में दोनों ही दंडनीय अपराध है दोनों ही स्थानों में संत समाज ने अपने दो -दो महात्माओं को खोया है, इसमें संलिप्त अपराधियों को चाहे वे सामूहिक हो या व्यक्तिगत कानून के दायरे में कठोर से कठोर सजा दी ही जानी चाहिए। हम किसी भी व्यक्ति को यह कह कर कानून के दायरे से ऊपर नहीं मान सकते कि यह व्यक्तिगत है या सामूहिक है, अपराध तो अपराध ही है चाहे वह किसी भी परिस्थिति में घटना कारित किया गया हो दंडनीय है। पिछले कुछ वर्षों से भारतीय समाज की सामाजिक सोंच में परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है जो अत्यंत दुखद है। भारत में किसी भी भीड़ या व्यक्तिगत रूप से संतो के प्रति हत्या जैसे अपराध की अपेक्षा नहीं की जा सकती । जिस भारतीय सनातन परंपरा में लोग संतो के चरण पखार कर अपना जीवन धन्य बनाते हैं। विश्व के किसी भी धर्म में संतों के प्रति इतना आदर और सम्मान देखने को प्राप्त नहीं होता । त्रिलोकीनाथ भगवान श्री रामचंद्र जी के पूज्य पिताश्री चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ जी ने भी मुनि विश्वामित्र जी का चरण पखार कर संपूर्ण संत समाज को गौरवान्वित किया। श्री रामचरितमानस में लिखा है कि -चरण पखारि कीन्हि अति पूजा, मो सम आजु धन्य नहीं दूजा। उस समाज में संतो की हत्या जैसी घटना का घटित होना संपूर्ण मानव समुदाय के लिए चिंता का विषय है। महाराष्ट्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार से हमें आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि इन घटनाओं में संलिप्त अपराधियों पर कठोरतम कार्यवाही करते हुए उनके लिए सजा सुनिश्चित करें ताकि समाज में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। महन्त महाराज ने यह कहा कि आखिर साधु -महात्मा मंदिर में नहीं रहेंगे तो कहां जाएंगे? उनकी समस्त सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।

 

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