नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026। शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान और श्रद्धा के साथ माता की पूजा करने से सुख-शांति, समृद्धि, बुद्धि और साहस का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और भोग अर्पित करते हैं।
मां स्कंदमाता पूजा 2026: शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, नवरात्रि की पंचमी तिथि 15 अक्टूबर 2026 को रात 1 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 16 अक्टूबर को रात 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी।

- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
- अमृत काल: रात 8:58 बजे से 10:45 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में पूजा करना मंगलकारी माना जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

मां स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व
मां स्कंदमाता का स्वरूप ममता, करुणा, शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। माता पार्वती अपने पुत्र भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को गोद में लेकर कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति कहा जाता है।
माता की चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित रहते हैं। एक हाथ से वे भगवान स्कंद को संभालती हैं और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। कमल पर विराजमान होने के कारण माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब संसार में राक्षसों का अत्याचार बढ़ने लगा, तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे देवताओं की सेना के सेनापति बने और दुष्ट शक्तियों के विरुद्ध युद्ध किया।
भगवान स्कंद की माता होने के कारण माता पार्वती को स्कंदमाता कहा जाने लगा। उनका यह स्वरूप मातृत्व, साहस और शक्ति का संदेश देता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां स्कंदमाता की आराधना करने वाले भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां स्कंदमाता के मंत्र
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
1. बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः।
2. सामान्य मंत्र
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।
3. प्रार्थना मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और माता का ध्यान करें।
मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीले रंग की मिठाइयां और अन्य सात्विक पकवान भी चढ़ाए जा सकते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें। भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई करके मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माता को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
- केले या अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं।
- मां स्कंदमाता के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा माता की आरती करें।
- अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।
मां स्कंदमाता की पूजा से क्या मिलता है लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है। भक्त ज्ञान, बुद्धि, साहस और संतान सुख की प्रार्थना करते हैं। माता का स्वरूप हमें ममता, धैर्य और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा के शुभ मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग का परामर्श लें।


