रायपुर, 31 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा के पास जंगली सूअर के शिकार के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कोंडागांव जिले का एक कथित पोटाश बम सप्लायर भी शामिल है। इस कार्रवाई के साथ ही शिकार से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, घटना सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र के रिसगांव रेंज अंतर्गत आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 254-255 के चिखलपानी में हुई थी। यहां एक नर जंगली सूअर (Sus scrofa) का शिकार किया गया था। यह वन्यजीव वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित है। इस मामले में 29 सितंबर 2026 को वन अपराध प्रकरण क्रमांक 70/22 दर्ज किया गया था।

जांच में सामने आया कि जंगली सूअर का शिकार पोटाश बम के जरिए किया गया था। यह एक तरह का देसी विस्फोटक चारा होता है, जो जानवर के काटने या खाने पर फट जाता है।
जांच के दौरान वन विभाग ने कोंडागांव जिले की विश्रामपुरी तहसील अंतर्गत कोरहाबेड़ा गांव निवासी भारत राठौर, पिता रामजी राठौर के घर सर्च वारंट के आधार पर तलाशी ली। उसे इस मामले का मुख्य आरोपी और विस्फोटक उपकरणों का सप्लायर बताया गया है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से कई संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
इसके बाद मिले सुरागों के आधार पर वन विभाग की टीम ने 29 अक्टूबर को छापेमारी कर फरार तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी को पूछताछ के लिए धमतरी जिले के सांकरा स्थित रिसगांव रेंज मुख्यालय लाया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
- भारत राठौर: निवासी कोरहाबेड़ा, जिला कोंडागांव (छत्तीसगढ़)। उस पर पोटाश बम बनाने, विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति करने और शिकार में शामिल होने का आरोप है।
- देवानंद उर्फ लैला (49): पिता मंगतूराम (कंवर), निवासी खिलौली, थाना कुंदई, तहसील रायघर, जिला नबरंगपुर (ओडिशा)।
- शेषम (38): पिता बड़गू (गोंड), निवासी खिलौली, जिला नबरंगपुर (ओडिशा)।
तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 2(1), 9, 20, 27, 29, 31, 32, 39(1)(a)(b), 49(b), 50, 50(c), 51 और 52 शामिल हैं।
आरोपियों को 30 अक्टूबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में धमतरी जिला जेल भेज दिया गया।
इस मामले में नबरंगपुर (ओडिशा) निवासी दो अन्य सह-आरोपी नरसिंह (50) और मानसिंह (22) को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। स्थानीय अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद दोनों फिलहाल धमतरी जेल में बंद हैं।
अंतरराज्यीय शिकार नेटवर्क की जांच में जुटा वन विभाग
वन अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला केवल एक वन्यजीव के शिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंतरराज्यीय शिकार नेटवर्क होने के संकेत मिले हैं। ओडिशा के शिकारियों और छत्तीसगढ़ के पोटाश बम निर्माता की संलिप्तता से दोनों राज्यों के बीच सक्रिय विस्फोटक सामग्री की सप्लाई चेन का पता चला है।
अधिकारियों ने देसी विस्फोटक चारे के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। इस तरह के विस्फोटक केवल लक्षित जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि रिजर्व में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा हैं। इससे बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीवों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
वन विभाग ने बताया कि पोटाश बम सप्लायर और शिकारियों, दोनों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।


