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आरु साहू का बायकॉट क्यों? : आरु साहू के समर्थन में उतरे प्रशंसक, #boycott के विरोध में #isupportaarusahu ने किया ट्रेंड, पढ़ें 14 साल की आरु साहू की सफलता की कहानी

प्रमोद मिश्रा

रायपुर, 30 अक्टूबर 2022

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की रहने वाली 14 साल की आरु साहू की आवाज के चाहनेवाले तो लाखों की संख्या में हैं । लेकिन, सिर्फ एक छठ पूजा का गीत दूसरी भाषा में गाने पर आरु साहू के बायकॉट की बात कई लोग सोशल मीडिया में कर रहे हैं । आरु साहू के बायकॉट वाले पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में आरु साहू के समर्थन में बहुत सारे लोग उतर आये हैं । आरु साहू के बायकॉट की बात करने वाले लोगों को आरु साहू के चाहने वाले ऐसे जवाब दे रहे हैं कि अब उनकी (आरु)बायकॉट की बात करने वाले लोग अपनी पोस्ट सोशल मीडिया से डिलीट कर रहे हैं । सिर्फ 14 साल की उम्र में अपना एक अलग मुकाम बनाने वाले आरु साहू के लाखों प्रशंसक है जो उनकी गीतों को सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं ।

 

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छत्तीसगढ़ लोक कला संस्कृति को समेटे आरु साहू जब किसी स्टेज में परफॉर्मेंस देती है, तो हर कोई उनकी आवाज का दीवाना हो जाता है । जिस उम्र में बच्चे माइक को पकड़ने में आनाकानी करते है, उस उम्र में आरु साहू ने लोगों के दिलों पर एक खास मुकाम बनाया है । सीएम से लेकर कई कैबिनेट मिनिस्टर और छालीवुड के कलाकार भी आरु साहू के गीतों को सुनकर उनकी तारीफ किये बिना अपने आपको रोक नहीं पाए हैं । राज्योत्सव के बड़े मंच से लेकर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जगहों में छत्तीसगढ़ की लोक गीतों को लोगों तक पहुंचाने का काम लोक गायिका आरु साहू ने किया है । सोशल मीडिया के हरेक प्लेटफॉर्म पर लाखों फॉलोवर्स आरु साहू के हैं ।

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छत्तीसगढ़ के तीज त्योहारों पर खुद गाना बनाकर अपनी आवाज से उसपर चार चांद लगाने वाली आरु साहू लोगों के बीच काफी पॉपुलर भी है । ऐसे में सिर्फ छठ पूजा पर एक गीत गाने वाली आरु साहू का विरोध समझ से परे हैं । आपको बताते चले कि आरु साहू ने छत्तीसगढ़ी के साथ हिंदी में गीत गाये हैं ।

आरु साहू ने इस विषय पर कहा कि मेरी पहचान छत्तीसगढ़िया संस्कृति, बोली और संगीत है। मैं इसी के दम पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रही हूं। मेरे गाए छठ गीत से मेरा मकसद किसी को आहत करना नहीं रहा। यदि किसी को मेरे काम से ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा चाहती हूं। छत्तीसगढ़िया संस्कृति का मैं पूरा सम्मान करती हूं।

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