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डरे पाकिस्‍तान को डूबोकर भी मारेगा भारत, खोल दिए चिनाब नदी पर सलाल डैम के 3 गेट, POK में बाढ़ जैसे हालात से मचा कोहराम

डेस्क

रामबन, 09 मई 2025

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान ने गुरुवार देर रात हमले के बाद शुक्रवार सुबह फिर से ड्रोन से हमले की कोशिश की है, जिसका भारतीय सेना ने करारा जवाब दिया। भारत हथियार, तोप, ड्रोन की लड़ाई के साथ-साथ कूटनीतिक वार के जरिए भी पाकिस्तान को पूरी तरह से परास्त कर रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। 9 मई की सुबह-सुबह चिनाब नदी पर बने सलाल बांध के 3 गेट खोल दिए गए हैं। रामबन में चिनाब नदी पर बने बगलिहार जलविद्युत परियोजना बांध का एक गेट खोल दिया गया है। अब इन गेटों को खोलने से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।

भारत सरकार के जलशक्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमारा उद्देश्य अपने जल संसाधनों का संप्रभु और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित करना है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय संधियों की समीक्षा की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।” आपको बता दें कि इसके पहले भारत ने चिनाब नदी के जल स्तर को कम कर दिया था। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने चेनाब नदी पर बगलिहार जलविद्युत परियोजना बांध के सभी गेट बंद कर दिए। चिनाब नदी पर बने सलाल डैम के सभी गेट भी बंद कर दिए गए थे। हालांकि भारत ने प्राकृतिक तौर पर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए समुद्री जीवों का ध्यान रखा है। समुद्री वन्यजीवों पर कोई खास असर न पड़े इसके लिए सलाल और बालीघर डैम के एक गेट से पानी छोड़ा जा रहा था।

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पाकिस्तान के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा

इससे पाकिस्तान के निचले इलाके पानी में डूब जाएंगे और पाकिस्तान भारत से ये भी नहीं कह पाएगा कि आपने पानी क्यों छोड़ दिया। इससे पाकिस्तान के लोगों की मुश्किलें बढ़ेगी। वो लोग इसके लिए पाकिस्तानी सरकार से सवाल पूछेंगे। पाकिस्तान के कई इलाकों में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।

कृषि मंत्री ने कही ये बात

उधर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा, “साल 1960 में जो सिंधु जल संधि हुई थी, वो एक ऐतिहासिक गलती थी। देश और किसानों का दुर्भाग्य रहा कि हमारे देश से बहने वाली नदियों का 80 प्रतिशत पानी पाकिस्तान को दे दिया गया…सिंधु नदी के पानी पर हमारे किसानों का हक है, एक-एक बूंद का उपयोग खेती,बिजली और विकास में करेंगे, इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल-प्रदेश के किसानों के लिए सिंचाई के लिए अधिक पानी मिल सकेगा”।

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