प्रमोद मिश्रा
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) की अधिकारी सौम्या चौरसिया के खिलाफ लगभग 8,000 पेज की चार्जशीट रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में दाखिल की है।

यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b) और 13(2) (संशोधित 2018) के तहत दर्ज किया गया था। जांच में सौम्या चौरसिया पर अवैध रूप से अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए हैं।
EOW की जांच में सामने आया कि चौरसिया, जो कोयला, जिला खनिज न्यास (DMF) फंड और अन्य मामलों से जुड़ी रही हैं, ने अपने परिवार के सदस्यों और परिचितों के नाम पर लगभग 45 अचल संपत्तियों में बेनामी निवेश किया था।
चार्जशीट के अनुसार, यह साबित हुआ है कि सौम्या चौरसिया ने सेवा अवधि के दौरान ₹49.69 करोड़ (₹49,69,48,298) की अवैध आय अर्जित की।
जांच में यह भी पाया गया कि 2008 बैच की एसएएस अधिकारी चौरसिया की कुल वैध आय मात्र ₹2.51 करोड़ (₹2,51,89,175) थी, जबकि उन्होंने ₹50 करोड़ से अधिक की संपत्ति में निवेश किया। इस प्रकार, उनके द्वारा अर्जित अवैध संपत्ति उनकी ज्ञात आय से 1872.86 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
EOW ने कहा कि यह ब्यूरो के इतिहास का सबसे बड़ा अनुपातहीन संपत्ति का मामला है। जांच में यह भी सामने आया कि 2019 से 2022 के बीच सौम्या चौरसिया द्वारा सबसे अधिक अवैध निवेश किया गया।
सौम्या चौरसिया ने 2005 में लेखाधिकारी (Accounts Officer) के रूप में कार्य प्रारंभ किया था। इसके बाद उन्हें बिलासपुर कलेक्टरेट में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ किया गया। वर्ष 2019 में वे मुख्यमंत्री कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर पदस्थ हुईं।





