प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 03 नवंबर 2025

एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई) ने भारत को एल्युमीनियम उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए खनन मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एएआई ने मंत्रालय को सौंपी एक विस्तृत प्रस्तुति में भारत के एल्युमीनियम उद्योग को “विजन 2047” के अनुरूप भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने हेतु ठोस नीति कदम उठाने की सिफारिश की है।
एएआई ने कहा है कि मौजूदा नीतिगत ढांचा घरेलू विनिर्माण उद्योग के लिए चुनौती बनता जा रहा है, क्योंकि एल्युमीनियम अधिशेष वाले देशों से आयात में तेजी आई है। संगठन ने प्रस्ताव रखा है कि सभी एल्युमीनियम उत्पादों पर समान 15% बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) लगाई जाए और गैर-मानक स्क्रैप आयात पर सख्त गुणवत्ता नियंत्रण नियम लागू किए जाएँ, ताकि भारत को निम्न गुणवत्ता वाले स्क्रैप के डंपिंग स्थल बनने से रोका जा सके।
एएआई का कहना है कि बीते पाँच वर्षों में एल्युमीनियम आयात में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में घरेलू उद्योग और निवेशकों की सुरक्षा के लिए मजबूत नीति ढाँचा आवश्यक है। संगठन ने आगाह किया है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो भारत “क्रिटिकल मिनरल्स” संकट जैसी स्थिति का सामना कर सकता है, जैसा चीन में रेयर अर्थ मटेरियल्स के मामले में देखा गया था।
एल्युमीनियम विज़न 2047 के अनुसार, यह धातु भारत की रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस, अवसंरचना, परिवहन और औद्योगिक विकास की रीढ़ मानी जा रही है। वर्तमान में देश में एल्युमीनियम की वार्षिक माँग 5.5 मिलियन टन है, जो 2030 तक 8.5 मिलियन टन और 2047 तक 37 मिलियन टन तक पहुँच सकती है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगभग 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी।
एएआई ने यह भी बताया कि एल्युमीनियम उद्योग अब तक 8 लाख से अधिक रोजगार पैदा कर चुका है और 4,000 से अधिक एमएसएमई को सहयोग दे रहा है। आने वाले समय में करीब 2 लाख करोड़ रुपए के नए निवेश से और रोजगार अवसर सृजित होंगे, जिससे सरकार के ‘विकसित भारत’ विज़न को बल मिलेगा।
यह प्रस्तुति एएआई द्वारा पहले वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव का विस्तार है, ताकि एल्युमीनियम क्षेत्र में नीति सुधार के लिए मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयास किए जा सकें।
👉 मुख्य बिंदु:
- सभी एल्युमीनियम उत्पादों पर 15% समान आयात शुल्क की सिफारिश
- गैर-मानक स्क्रैप आयात पर सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की मांग
- 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावनाएँ
- 2047 तक माँग 6 गुना बढ़ने का अनुमान
- एल्युमीनियम क्षेत्र में 8 लाख से अधिक रोजगार सृजित
भारत के एल्युमीनियम उद्योग को आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए एएआई ने सरकार से ठोस नीति सुधारों की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि अभी निर्णायक कदम उठाए गए तो भारत न केवल घरेलू जरूरतें पूरी कर सकेगा, बल्कि वैश्विक एल्युमीनियम आपूर्ति श्रृंखला में अग्रणी भूमिका भी निभा सकता है।





