प्रमोद मिश्रा
रायपुर, 26 नवंबर 2025

साय सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर विभागीय उपलब्धियों को साझा करने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने विभाग की दो साल की प्रमुख उपलब्धियाँ सामने रखीं।
उन्होंने बताया कि राज्य में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल से बढ़ाकर 21 क्विंटल कर दी गई है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
सचिव ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में—
- 25 लाख 49 हजार किसानों के माध्यम से धान का व्यापक उपार्जन किया गया।
- 25 लाख किसानों को 34 करोड़ 348 रुपए तथा अतिरिक्त 12 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।
- केंद्रीय लक्ष्य 6.38 लाख मीट्रिक टन निर्धारित था।
- मिलर्स का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है।
बीते 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो चुकी है।
- इस वर्ष 26 लाख 49 हजार किसान पंजीकृत हैं।
- 1 लाख 17 हजार 500 किसानों से अब तक धान खरीदा गया।
- कुल 77 क्विंटल धान खरीदा गया है।
- 11 सौ 50 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
- धान खरीदी के 9वें दिन सभी केन्द्रों में बिना किसी बाधा के सुचारू व्यवस्था रही।
- धान खरीदी के लिए नई ‘तुम्हार टोकन’ प्रणाली शुरू की गई है।
- अब तक 3 हजार टोकन जारी हो चुके हैं।
- 8 बजे सुबह से 5 बजे तक टोकन जारी होंगे।
- मोबाइल ऐप के माध्यम से किसान आसानी से टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
- 5 एकड़ से कम भूमि वाले 23 लाख लघु एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता से टोकन दिया जाएगा।
- समिति व्यवस्था के अनुसार हमालों को 5 रुपए प्रति बोरा भुगतान किया जाता है।
- पिछली बार 2200 समितियों को 450 करोड़ रुपए जारी किए गए थे।
सचिव कंगाले ने बताया—
- बैंक सर्विस के रूप में राशि जारी की जा रही है।
- लाल, पीले और हरे – इन तीन श्रेणियों में धान संबंधित शिकायतें दर्ज होती हैं।
- अलर्ट सेंटर से निकलने वाली गाड़ियों पर विभाग की सख्त नजर रहेगी।
- खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी जानकारी समय पर शेयर की जा रही है।
- गरीबी रेखा वाले 11 लाख नए परिवारों को शामिल किया गया, जिससे अब लाभार्थी संख्या बढ़कर 82 लाख सदस्य हो गई है।
- नए राशन कार्ड जारी करने और पुराने कार्ड के नवीनीकरण व बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पर तेजी से काम जारी है।
खाद्य विभाग की सचिव ने दावा किया कि साय सरकार की यह व्यवस्था देश की सबसे को-ऑपरेटिव फ्रेंडली स्कीम के रूप में उभरी है और किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक, सभी को इसका लाभ मिल रहा है।





