प्रमोद कुमार
रायपुर, 13 जनवरी 2026

भारतीय भाषा समिति (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और कलिंगा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषा परिवार: नए क्षितिज, नई दृष्टि और भाषाई एकता का भविष्य” विषय पर 9–10 जनवरी, 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में 21 वक्ताओं और 179 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस दौरान सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान और हिंदी को राष्ट्र की संपर्क भाषा के रूप में सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में भारतीय भाषा परिवार पुस्तिका का विमोचन भी हुआ।
कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएँ हमारी सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला हैं और शिक्षा व अनुसंधान में इनकी भूमिका निरंतर बढ़नी चाहिए।
मुख्य वक्ता जनसंपर्क विभाग के अपर निदेशक आलोक देव ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यता की रीढ़ है। उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में भारतीय भाषा समिति की भूमिका को रेखांकित किया।
प्रसिद्ध लेखक वरुण श्रीवास्तव ने कहा कि भाषाएँ राष्ट्रीय एकता की मजबूत कड़ी हैं और सभी भारतीय भाषाओं को अपने स्वाभाविक रूप में फलने-फूलने का अवसर मिलना चाहिए। पर्यटन विभाग की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने परंपरा से डिजिटल युग तक भाषाओं की यात्रा और भाषाई एकता पर विचार रखे।
एमिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वाराप्रसाद ने प्राचीन ज्ञान परंपराओं से लेकर आधुनिक शिक्षा तक भारतीय भाषाओं की वैज्ञानिक समृद्धि को रेखांकित किया और हिंदी को मातृभाषा के रूप में सशक्त करने पर बल दिया।
समापन सत्र में कुलपति डॉ. आर. श्रीधर ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा, अनुसंधान और प्रशासन से ही भारत की भाषाई शक्ति सुदृढ़ होगी। संयुक्त कलेक्टर रुचि शर्मा ने भारतीय भाषाओं को विज्ञान, दर्शन और तकनीकी ज्ञान की समृद्ध वाहक बताया।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुभाष मिश्रा ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं को समान मंच मिलने से ज्ञान का विकेंद्रीकरण और सामाजिक न्याय को बल मिलेगा।
संगोष्ठी में डॉ. ई. वी. राव, डॉ. अजय शुक्ला, डॉ. अनिल द्विवेदी, डॉ. मोतीलाल शाकर, डॉ. देवेंद्र शुक्ला, डॉ. दुर्गावती भारती, डॉ. अंचल श्रीवास्तव और डॉ. दिनेश श्रीवास ने भी विचार रखे।
अतिथियों को स्मृति-चिह्न, शॉल और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जबकि प्रतिभागियों को किट और सहभागिता प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आयोजन सचिव डॉ. योगेश वैष्णव और डॉ. हर्षा शर्मा रहे। कार्यक्रम का समापन संयोजक डॉ. ए. राजशेखर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।





