प्रमोद कुमार
रायपुर, 04 फ़रवरी 2026

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है। करीब 379 दिन जेल में रहने के बाद आज शाम लगभग 4 बजे तक उनकी रिहाई संभव है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं। आदेश के मुताबिक कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा, लेकिन कोर्ट में पेशी के लिए वे राज्य में आ सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना, वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा।
ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद 7 दिन की रिमांड पर पूछताछ हुई। इसके बाद उन्हें 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे।
करीब दो महीने पहले कांग्रेस ने कवासी लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए इसे मानवाधिकार का मुद्दा बताया था।
करीब तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने ED को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने पूछा था—
- ऐसी कौन-सी जांच अभी बाकी है?
- जांच पूरी करने में और कितना समय लगेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने ED को जांच अधिकारी का पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि लखमा के खिलाफ कौन-सी जांच अब भी चल रही है।
ED का आरोप है कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के अहम हिस्से थे और उनके निर्देश पर ही पूरा नेटवर्क काम करता था।
ED के अनुसार—
- लखमा की भूमिका शराब नीति में बदलाव में अहम रही
- FL-10 लाइसेंस की शुरुआत उन्हीं के इशारे पर हुई
- आबकारी विभाग की गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई
ED ने कोर्ट में दावा किया था कि—
- शराब घोटाला करीब 3 साल तक चला
- लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे
- कुल 72 करोड़ रुपए की अवैध कमाई हुई
ED के मुताबिक इस रकम से उनके बेटे हरीश कवासी का घर और कांग्रेस भवन सुकमा का निर्माण किया गया।
ED का दावा है कि शराब घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और सिंडिकेट के जरिए 2100 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई की गई। इसमें नेता, अफसर और कारोबारी शामिल थे।
ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 2000 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। जांच के अनुसार तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में—
- IAS अनिल टुटेजा
- आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी
- कारोबारी अनवर ढेबर
के सिंडिकेट ने मिलकर घोटाले को अंजाम दिया।
A कैटेगरी:
डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन
B कैटेगरी:
नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से शराब की बिक्री
C कैटेगरी:
डिस्टलरी सप्लाई एरिया घटा-बढ़ाकर अवैध वसूली
जांच में सामने आया है कि 40 लाख पेटी से ज्यादा अवैध शराब बेची गई।
सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद बीजापुर जिला मुख्यालय में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया।





