प्रमोद कुमार
रायपुर, 06 फ़रवरी 2026

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ संस्कृति एवं संग्रहालय विशेषज्ञ अशोक तिवारी को भारत सरकार की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय टैगोर शोधवृत्ति (National Tagore Fellowship) के लिए चयनित किया गया है। इस उपलब्धि के साथ वे छत्तीसगढ़ से यह सम्मान प्राप्त करने वाले पहले शोधार्थी बन गए हैं।
अशोक तिवारी को यह फेलोशिप छत्तीसगढ़ की लोक एवं जनजातीय चित्रकला और मूर्तिकला पर गहन अध्ययन के लिए प्रदान की गई है। उनके शोध का विषय है—
“Sacred and Decorative: Painted and Sculpted Folk and Tribal Arts of Chhattisgarh”।
फेलोशिप की अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय टैगोर फेलोशिप को सांस्कृतिक अनुसंधान के क्षेत्र में देश की सबसे प्रतिष्ठित शोधवृत्तियों में गिना जाता है। ऐसे में किसी भी राज्य से पहले चयन का गौरव मिलना छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अशोक तिवारी पिछले पाँच दशकों से अधिक समय से कला और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में लगभग तीन दशकों तक सेवाएं देते हुए इस राष्ट्रीय संस्थान के निर्माण और विकास में अहम भूमिका निभाई।
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खानपान केंद्र गढ़कलेवा की परिकल्पना और निर्माण में वे प्रमुख क्यूरेटर रहे हैं। वहीं, रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में निर्मित प्रथम मुक्ताकाश प्रदर्शनी ‘आमचो बस्तर’ का क्यूरेशन भी उनके द्वारा किया गया।
पिछले लगभग आठ वर्षों से वे देश-विदेश में निवासरत प्रवासी छत्तीसगढ़िया समाज पर निरंतर शोध कर रहे हैं। इस विषय पर उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के रूप में कार्यरत हैं।
राष्ट्रीय टैगोर शोधवृत्ति के लिए अशोक तिवारी का चयन छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और अकादमिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।





