प्रमोद कुमार
रायपुर, 01 मार्च 2026/ यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों को ‘काला कानून’ बताते हुए सवर्ण समाज ने राजपूत क्षत्रिय महासभा भवन में बैठक आयोजित की। बैठक में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रमुख लोग उपस्थित रहे और कानून को छात्र-छात्राओं के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध किया।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उक्त कानून समाज में असमानता को बढ़ावा देता है, छात्र-छात्राओं के बीच अविश्वास की स्थिति पैदा करता है तथा एकतरफा कार्रवाई को बढ़ावा देने की आशंका है। वक्ताओं का आरोप था कि इससे सवर्ण वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव हो सकता है और शिक्षा के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उपस्थित सदस्यों ने केंद्र सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।
चर्चा के दौरान डॉ. अजय त्रिपाठी ने कहा कि वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रावधान के तहत सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में अब तक इसका समुचित लाभ नहीं मिल पाया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल Raman Deka तथा मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखकर सवर्ण समाज के हित में न्याय की मांग की जाएगी।
रीना राजपूत ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शीघ्र लाभ नहीं देती है, तो सवर्ण समाज प्रदेश स्तरीय आंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बैठक में मोरध्वज सिंह बैंस, अमृत लाल, अरविंद महाराज, पंकज पांडे, शशि व्यास, सीताराम राजपूत, रंजना सिंह ठाकुर, राम प्रकाश तिवारी, वीरेन्द्र कुमार चौबे, देवांश तिवारी, मनीष शर्मा, अजय सिंह राजपूत, श्रवण शर्मा, राजेंद्र सिंह क्षत्रिय, प्रवीण कुमार अग्रवाल, विमल कुमार ओझा, रीना राजपूत, डॉ. अजय त्रिपाठी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।





