रायपुर, 08 अप्रैल 2026। खनिज संपदा से समृद्ध ओडिशा और छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर देश की इंडस्ट्री को कोयला, बॉक्साइट और लौह अयस्क मिलता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, पोषण की कमी और अस्पतालों तक सीमित पहुंच यहां के लोगों के लिए गंभीर समस्या है।

ऐसे में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत चल रहे स्वास्थ्य हस्तक्षेप इन इलाकों में उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। वेदांता एल्युमीनियम द्वारा संचालित पहलें अब गांव-स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक इलाज की पूरी कड़ी तैयार कर रही हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या अस्पताल तक पहुंच है। इसे ध्यान में रखते हुए मोबाइल हेल्थ यूनिट (MHU) को झारसुगुड़ा, कालाहांडी, सुंदरगढ़ और छत्तीसगढ़ के कोरबा जैसे जिलों में तैनात किया गया है। ये यूनिट गांवों में जाकर प्राथमिक जांच, दवाइयां और बेसिक डायग्नोस्टिक सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
कोरबा की आशा पटेल जैसी कई मरीजों को इससे राहत मिली है, जो वर्षों से आर्थराइटिस और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रही थीं। नियमित जांच और इलाज से अब उनकी स्थिति में सुधार आया है।
इन मोबाइल यूनिट्स के जरिए ओडिशा और छत्तीसगढ़ के 200 से अधिक गांवों में घर-घर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों, आशा और एएनएम के साथ मिलकर शुरुआती जांच, रेफरल और फॉलो-अप को मजबूत किया जा रहा है।
सिर्फ मोबाइल सेवा ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर भी विकसित किए गए हैं।
- कालाहांडी का एमएसजेके हॉस्पिटल सेकेंडरी केयर सुविधा दे रहा है
- झारसुगुड़ा में डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच आसान हुई
इससे मरीजों को दूर शहरों में जाने की जरूरत कम हो रही है।
गंभीर बीमारियों, खासकर कैंसर के इलाज के लिए छत्तीसगढ़ के नया रायपुर में बाल्को मेडिकल सेंटर (BMC) को विकसित किया गया है। 170 बेड वाले इस अस्पताल में अब तक 66 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज हो चुका है।
यहां स्क्रीनिंग से लेकर इलाज और फॉलो-अप तक की सुविधा एक ही जगह उपलब्ध है। खास बात यह है कि करीब 60% मरीज ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आते हैं, जिन्हें पहले इलाज के लिए मेट्रो शहरों का रुख करना पड़ता था।
वेदांता एल्युमीनियम के इस समग्र मॉडल से अब तक:
- 7 लाख से ज्यादा लोग लाभान्वित
- 4 लाख से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य जागरूकता
- 1.74 लाख मरीजों ने अस्पतालों में इलाज कराया
विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल हेल्थ यूनिट, स्थानीय अस्पताल और कैंसर केयर सेंटर जैसे प्रयासों से इलाज की दूरी कम हुई है। इससे समय पर बीमारी की पहचान और उपचार संभव हो पा रहा है।
निष्कर्ष:
ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां भौगोलिक चुनौतियां बड़ी हैं, वहां इस तरह के मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण भारत के लिए एक प्रभावी हेल्थकेयर मॉडल साबित हो सकती है।



